Showing posts with label romanch. Show all posts
Showing posts with label romanch. Show all posts

Sunday, 19 June 2016

हैरी पॉटर और आग का प्याला




Harry Potter aur Aag ka Pyala

उपन्यास की इस चौथी कड़ी में हैरी को हॉग्वार्ट्स में ज़बरन तीन-जादूगर प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ता है जिसके तीन चरण हैं और जिसमें तीन जादू-विद्यालय भाग लेते हैं। पहले चरण में हैरी ड्रैगन से लड़ता है, दूसरे चरण में झील के पानी के नीचे संघर्ष करता है और तीसरे चरण में उसे भूल-भुलैया में से ट्रॉफ़ी लेनी होती है। उलटे वो और उसका सह-प्रतिद्वन्दी (सॅड्रिक डिगरी) ट्रॉफ़ी छूते ही लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट के पास पहुँच जाते हैं, जहाँ वर्मटेल सॅड्रिक का कत्ल कर देता है और हैरी के ख़ून की मदद से वो लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट को जिस्मो-जान समेत ज़िन्दा कर देता है। मगर हैरी वोल्डेमॉर्ट की पकड़ से इस बार भी भाग निकलता है। वोल्डेमॉर्ट के वापिस ज़िन्दा हो कर आने की बात को ब्रिटेन का जादूमन्त्री कॉर्नेलियस फ़ज झूठ करार देता है।

डाउनलोड करें- आग का प्याला

Sunday, 29 November 2015

हैरी पॉटर और अज़्काबान का कैदी

Harry Potter aur Azkaban ka Kaidi

हैरी पॉटर सीरीज़ की तीसरी पुस्तक
हैरी पॉटर अपने दोस्तों रॉन और हर्माइनी के साथ हॉगवर्ट्स जादू और तंत्र के विद्यालय में थर्ड ईयर की पढ़ाई शुरू करने वाला है। गर्मी की छुट्टियों के बाद हैरी स्कूल जाने के लिए बेताब है। इसमें कोई अजीब बात नहीं है, क्योंकि उसे डर्स्ली परिवार में रहना बहुत भयानक लगता है। लेकिन जब हैरी हॉगवर्ट्स पहुँचता है, तो उसे वहाँ भी तनावपूर्ण माहौल ही मिलता है। हर तरफ दहशत फैली है...तेरह लोगों की सामूहिक हत्या करने वाला खूनी अज़्काबान जेल से भाग, निकला है और उसके इरादे खूँखार हैं। अब उस खूनी का अगला निशाना हॉगवर्ट्स ही है, जहाँ हैरी पढ़ता है। यही वजह है कि हॉगवर्ट्स स्कूल की रखवाली के लिए दमपिशाचों यानी अज्काबान के खतरनाक पहरेदारों को बुलाया गया है....क्या उसका निशाना हैरी पॉटर है?...क्या वह खूनी अपने इरादों में कामयाब हो पाएगा

हैरी और उसके दोस्तों की मंत्रमुग्ध करने वाली नई कहानी, जिसे जे. के. रोलिंग ने अपने चिर-परिचित मनमोहक अंदाज़ में लिखा है।

डाउनलोड करें- अज़्काबान का कैदी

Sunday, 18 October 2015

हैरी पॉटर और रहस्यमयी तहखाना

जब से हैरी पॉटर गर्मी की छुट्टियों में घर लौटा था, तभी से उसके अंकल-आंटी उससे बहुत घटिया और बुरा व्यवहार कर रहे थे। वह एक बार फिर हॉगवर्ट्स जादू और तंत्र के विद्यालय में जाने के लिए छटपटा रहा था। परंतु तभी एक घरेलू जिन्न हैरी के पास आता है और उसे चेतावनी देता है कि अगर वह हॉगवर्ट्रस जाएगा, तो भयानक घटनाएँ होंगी, जिनमें उसकी जान भी जा सकती है।

और भयानक घटनाएँ होती भी हैं। हैरी को हॉगवर्ट्स में अपने दूसरे साल में बहुत से रोमांचक अनुभव होते हैं, जिनमें कार उड़ाने से लेकर क्विडिच के खेल में पहलवान से जान बचाने तक की घटनाएँ शामिल हैं। परंतु आतंक का असली माहौल तब शुरू होता है, जब रहस्यमयी तहखाना खुलता है और हॉगवर्ट्स के विद्यार्थी एक के बाद एक बेजान होने लगते हैं।

तहखाने को कौन खोल रहा है ? कहीं यह ड्रेको मैल्फॉल तो नहीं है, जिसके पिता शैतानी जादूगर वोल्डेमॉर्ट के खास सहयोगी थे ? कहीं यह हैग्रिड तो नहीं है, जिसके रहस्यमयी अतीत का अंततः पर्दाफाश हो जाता है ? या फिर कहीं यह वह विद्यार्थी तो नहीं है, जिस पर हॉगवर्ट्स में सबसे ज्यादा शक किया जा रहा है....खुद हैरी पॉटर !

हैरी पॉटर सीरीज़ की दूसरी पुस्तक
Harry Potter and Chamber of Secrets का हिंदी अनुवाद

डाऊनलोड करें- हैरी पॉटर और रहस्यमयी तहखाना

चंद्रकांता संतति भाग 2 (Chandrakanta Santati)

Chandrakanta Santati- 2 by Dewki Nandan Khatri

चंद्रकांता संतति लोक विश्रुत साहित्यकार बाबू देवकीनंदन खत्री का विश्वप्रसिद्ध ऐय्यारी उपन्यास है।


खत्री जी ने पहले चन्द्रकान्ता लिखा फिर उसकी लोकप्रियता और सफलता को देख कर उन्होंने कहानी को आगे बढ़ाया और 'चन्द्रकान्ता संतति' की रचना की। हिन्दी के प्रचार प्रसार में यह उपन्यास मील का पत्थर है। कहते हैं कि लाखों लोगों ने चन्द्रकान्ता संतति को पढ़ने के लिए ही हिन्दी सीखी। घटना प्रधान, तिलिस्म, जादूगरी, रहस्यलोक, एय्यारी की पृष्ठभूमि वाला हिन्दी का यह उपन्यास आज भी लोकप्रियता के शीर्ष पर है।


बाबू देवकीनंदन खत्री लिखित चन्द्रकान्ता संतति हिन्दी साहित्य का ऐसा उपन्यास है जिसने पूरे देश में तहलका मचाया था। इस उपन्यास की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसे पढ़ने के लिए हजारों गैर-हिंदी भाषियों ने हिंदी सीखी। चंद्रकांता संतति उपन्यास को आधार बनाकर निरजा गुलेरी ने इसी नाम से टेलीविजन धारावाहिक बनाई। यह धारावाहिक दूरदर्शन के सर्वाधिक लोकप्रिय धारावाहिकों में शुमार हुई।


"चन्द्रकान्ता" और "चन्द्रकान्ता सन्तति" में यद्यपि इस बात का पता नहीं लगेगा कि कब और कहाँ भाषा का परिवर्तन हो गया परन्तु उसके आरम्भ और अन्त में आप ठीक वैसा ही परिवर्तन पायेंगे जैसा बालक और वृद्ध में। एक दम से बहुत से संस्कृत शब्दों का प्रचार करते तो कभी सम्भव न था कि उतने संस्कृत शब्द हम ग्रामीण लोगों को याद करा देते। इस पुस्तक के लिए वह लोग भी बोधगम्य उर्दू के शब्दों को अपनी विशुद्ध हिन्दी में लाने लगे जो आरम्भ में इसका विरोध करते थे।


डाऊनलोड करें- चंद्रकांता संतति भाग 2

Tuesday, 13 October 2015

हैरी पॉटर 1 (पारस पत्थर) Harry Potter



न तो क्विडिच टीम का हीरो था, न ही जादुई झाड़ू पर सवार होकर हवा में उड़ते हुये पॉइंट बनाता था। न तो वह मंत्र जानता था, न ही कभी उसने अंडे से ड्रैगन निकलते देखा था और न ही कभी उसने अदृश्य चोगा पहना था।
उसने अपने अंकल-आंटी यानी डर्स्ली पति-पत्नी और उनके मोटे, दु्ष्ट बेटे डडली के साथ रहते हुये जीवन भर दुख झेला था। कमरे के नाम पर हैरी के पास थी सीढ़ियों के नीचे बनी एक छोटी अलमारी और ग्यारह सालों में उसका जन्मदिन कभी किसी ने नहीं मनाया था।
परंतु यह सब बदल जाता है जब एक भीमकाय आदमी उसके नाम की एक रहस्यमय चिट्ठी लेकर आता हैः जिसमें एक ऐसी अविश्वसनीय जगह पर जाने का आमंत्रण है जिसे हैरी-और उसकी कहानी पढ़ने वाला कोई भी व्यक्ति-भूला नहीं पायेगा।
क्योंकि वहाँ उसे दोस्त मिलते हैं, हवाई खेल मिलते हैं, क्लास से लेकर भोजन तक हर चीज में जादू मिलता है। और साथ में मिलता है नाम कमाने का महान अवसर भी, जो उसका इंतजार कर रहा है, बशर्ते हैरी मुठभेड़ में बच सके।



डाऊनलोड करें- हैरी पॉटर और पारस पत्थर

Monday, 12 October 2015

भूतनाथ भाग 3 (Bhutnath 3)-देवकीनंदन खत्री


भूतनाथ, इक्कीस भाग व सात खण्डों में, ‘चन्द्रकान्ता’ व ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ की ही परम्परा और श्रृंखला का, बाबू देवकीनन्दन खत्री विरचित एक अत्यन्त लोकप्रिय और बहुचर्चित प्रसिद्ध उपन्यास है। ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ में ही बाबू देवकीनन्दन खत्री के अद्भुत पात्र भूतनाथ (गदाधर सिंह) ने अपनी जीवनी (जीवन-कथा) प्रस्तुत करने का संकल्प किया था। यह संकल्प वस्तुतः लेखक का ही एक संकेत था कि इसके बाद ‘भूतनाथ’ नामक बृहत् उपन्यास की रचना होगी। देवकीनन्दन खत्री की अद्भुत कल्पना-शक्ति को शत-शत नमन है। लाखों करोड़ों पाठकों का यह उपन्यास कंठहार बना हुआ है। जब यह कहा जाता है कि ‘चन्द्रकान्ता’ और ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ उपन्यासों को पढ़ने के लिए लाखों लोगों ने हिन्दी भाषा सीखी तो इस कथन में ‘भूतनाथ’ भी स्वतः सम्मिलित हो जाता है क्योंकि ‘भूतनाथ’ उसी तिलिस्मी और ऐयारी उपन्यास परम्परा ही नहीं, उसी श्रृंखला का प्रतिनिधि उपन्यास है। कल्पना की अद्भुत उड़ान और कथारस की मार्मिकता इसे हिन्दी साहित्य की विशिष्ट रचना सिद्ध करती है। मनोरंजन का मुख्य उद्देश्य होते हुए भी इसमें बुराई और असत् पर अच्छाई और सत् की विजय का शाश्वत विधान ऐसा है जो इसे एपिक नॉवल (Epic Novel) यानी महाकाव्यात्मक उपन्यासों की कोटि में लाता है। ‘भूतनाथ’ का यह शुद्ध पाठ-सम्पादन और भव्य नवप्रकाशन, आशा है, पाठकों को विशेष रुचिकर प्रतीत होगा।


डाऊनलोड करें- भूतनाथ भाग 3

Saturday, 10 October 2015

फिफ्टी शेड्स डार्कर (हिंदी)- ई एल जेम्स

भूतनाथ भाग 2 (Bhootnath 2)- देवकी नंदन खत्री



भूतनाथ, इक्कीस भाग व सात खण्डों में, ‘चन्द्रकान्ता’ व ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ की ही परम्परा और श्रृंखला का, बाबू देवकीनन्दन खत्री विरचित एक अत्यन्त लोकप्रिय और बहुचर्चित प्रसिद्ध उपन्यास है। ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ में ही बाबू देवकीनन्दन खत्री के अद्भुत पात्र भूतनाथ (गदाधर सिंह) ने अपनी जीवनी (जीवन-कथा) प्रस्तुत करने का संकल्प किया था। यह संकल्प वस्तुतः लेखक का ही एक संकेत था कि इसके बाद ‘भूतनाथ’ नामक बृहत् उपन्यास की रचना होगी। देवकीनन्दन खत्री की अद्भुत कल्पना-शक्ति को शत-शत नमन है। लाखों करोड़ों पाठकों का यह उपन्यास कंठहार बना हुआ है। जब यह कहा जाता है कि ‘चन्द्रकान्ता’ और ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ उपन्यासों को पढ़ने के लिए लाखों लोगों ने हिन्दी भाषा सीखी तो इस कथन में ‘भूतनाथ’ भी स्वतः सम्मिलित हो जाता है क्योंकि ‘भूतनाथ’ उसी तिलिस्मी और ऐयारी उपन्यास परम्परा ही नहीं, उसी श्रृंखला का प्रतिनिधि उपन्यास है। कल्पना की अद्भुत उड़ान और कथारस की मार्मिकता इसे हिन्दी साहित्य की विशिष्ट रचना सिद्ध करती है। मनोरंजन का मुख्य उद्देश्य होते हुए भी इसमें बुराई और असत् पर अच्छाई और सत् की विजय का शाश्वत विधान ऐसा है जो इसे एपिक नॉवल (Epic Novel) यानी महाकाव्यात्मक उपन्यासों की कोटि में लाता है। ‘भूतनाथ’ का यह शुद्ध पाठ-सम्पादन और भव्य नवप्रकाशन, आशा है, पाठकों को विशेष रुचिकर प्रतीत होगा।

डाऊनलोड करें- भूतनाथ भाग 2

चंद्रकांता संतति भाग 1 - देवकीनन्दन खत्री




चंद्रकांता संतति को एक प्रेम कथा कहा जा सकता है। इस शुद्ध लौकिक प्रेम कहानी को, दो दुश्मन राजघरानों, नौगढ़ और विजयगढ़ के बीच, प्रेम और घृणा का विरोधाभास आगे बढ़ाता है। विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजकुमार वीरेंद्र सिंह को आपस मे प्रेम है, लेकिन राजपरिवारों में दुश्मनी है। दुश्मनी का कारण है कि विजयगढ़ के महाराज नौगढ़ के राजा को अपने भाई की हत्या का ज़िम्मेदार मानते हैं। हालांकि इसका ज़िम्मेदार विजयगढ़ का महामंत्री क्रूर सिंह है, जो चंद्रकांता से शादी करने और विजयगढ़ का महाराज बनने का सपना देख रहा है। राजकुमारी चंद्रकांता और राजकुमार वीरेंद्र की प्रमुख कथा के साथ-साथ ऐयार तेजसिंह तथा ऐयारा चपला की प्रेम कहानी भी चलती रहती है। कथा का अंत नौगढ़ के राजा सुरेन्द्र सिंह के पुत्र वीरेंद्र तथा विजयगढ़ के राजा जयसिंह की पुत्री चंद्रकांता के परिणय से होता है।

चन्द्रकान्ता और चन्द्रकान्ता सन्तति
"चन्द्रकान्ता" और "चन्द्रकान्ता सन्तति" में यद्यपि इस बात का पता नहीं लगेगा कि कब और कहाँ भाषा का परिवर्तन हो गया परन्तु उसके आरम्भ और अन्त में आप ठीक वैसा ही परिवर्तन पायेंगे जैसा बालक और वृद्ध में। एक दम से बहुत से शब्दों का प्रचार करते तो कभी सम्भव न था कि उतने संस्कृत शब्द हम ग्रामीण लोगों को याद करा देते। इस पुस्तक के लिए वह लोग भी बोधगम्य उर्दू के शब्दों को अपनी विशुद्ध हिन्दी में लाने लगे हैं जो आरम्भ में इसका विरोध करते थे। इस प्रकार प्राकृत प्रवाह के साथ साथ साहित्यसेवियों की सरस्वती का प्रवाह बदलता देख कर समय के बदलने का अनुमान करना कुछ अनुचित नहीं है। भाषा के विषय में यही होना चाहिए कि वह सरल हो और नागरी वाणी में हो क्योंकि जिस भाषा के अक्षर होते हैं उनका खिंचाव उन्हीं मूल भाषाओं की ओर होता है जिससे उनकी उत्पत्ति हुई है।

चन्द्रकान्ता संतति
बाबू देवकीनंदन खत्री लिखित चन्द्रकान्ता संतति हिन्दी साहित्य का ऐसा उपन्यास है जिसने पूरे देश में तहलका मचाया था। बाबू देवकीनन्दन खत्री ने पहले चन्द्रकान्ता लिखा फिर चन्द्रकान्ता की लोकप्रियता और सफलता को देख कर उन्होंने चन्द्रकान्ता की कहानी को आगे बढ़ाया और चन्द्रकान्ता संतति की रचना की। हिन्दी के प्रचार प्रसार में यह उपन्यास मील का पत्थर है। कहते हैं कि लाखों लोगों ने चन्द्रकान्ता संतति को पढ़ने के लिए ही हिन्दी सीखी। घटना प्रधान, तिलिस्म, जादूगरी, रहस्यलोक, एय्यारी की पृष्ठभूमि वाला हिन्दी का यह उपन्यास आज भी लोकप्रियता के शीर्ष पर है।


डाऊनलोड करें- चंद्रकांता संतति भाग 1

Sunday, 4 October 2015

भूतनाथ भाग-1 (Bhutnath)

भूतनाथ बाबू देवकीनंदन खत्री का तिलस्मि उपन्यास है ! चंद्रकान्ता की कहानी चंद्रकान्ता संतति मे आगे बढ़ाई गयी है! और संतति के बाद उसी कहानी को भूतनाथ और उसके बाद रोहतास मठ के ज़रिए अंज़ाम तक पहुँचाया गया है! चंद्रकान्ता संतति मे एक रहस्मयी किरदार का आगमन् होता है जो पहले के सभी ऐयारो से तेज़ है सही काम करने के लिए ग़लत रास्ता अपनाने से नही चूकता ओर हमेशा इस कशमकश मे जीता रहता है की वह वास्तव मे किस चरित्र का है? ग़लत लोग जैसे दारोगा, शिवदत्त उसे अपने जैसा ग़लत ओर इन्द्रदेव उसे सही साबित करने मे लगे रहते है! चंद्रकान्ता संतति मे भूतनाथ का आगमन एक तुरुप के पत्ते की तरह होता है जो छलावे की तरह आता है ओर बाज़ी पलट के चला जाता है! भूतनाथ कान का कच्चा इंसान है जो सभी की बातो मे आ जाता है! कभी वो बुराई की मदद करता है चंद्रकान्ता संतति के पूरक के रूप मे भूतनाथ सीरीस लिखी गयी थी! ये 7 ज़िल्द का उपन्यास बाबू देवकीनंदन खत्री का महत्वआकांक्षी उपन्यास था जिसे वो पूरा नही कर सके! माना जाता है की अगर वो इसे पूरा कर पाते तो ये उपन्यास काल्पनिक उपन्यासो का सरताज होता! पर खत्री जी का इस उपन्यास को पूरा करने से पहले ही निधन हो गया! उनके बेटे दुर्गा प्रसाद खत्री ने इस उपन्यास को पूरा किया! पर बाबू देवकी नंदन खत्री की लेखनी की चमत्कृतता इनकी लेखनी मे नही थी फिर भी इन्होने इस कहानी पूरा किया! बाद मे दुर्गा प्रसाद जी ने रोहतास मठ नाम से इस विस्मयकारी शृंखला का समापन किया!

डाऊनलोड करें- भूतनाथ भाग-1