Sunday, 4 October 2015

भूतनाथ भाग-1 (Bhutnath)

भूतनाथ बाबू देवकीनंदन खत्री का तिलस्मि उपन्यास है ! चंद्रकान्ता की कहानी चंद्रकान्ता संतति मे आगे बढ़ाई गयी है! और संतति के बाद उसी कहानी को भूतनाथ और उसके बाद रोहतास मठ के ज़रिए अंज़ाम तक पहुँचाया गया है! चंद्रकान्ता संतति मे एक रहस्मयी किरदार का आगमन् होता है जो पहले के सभी ऐयारो से तेज़ है सही काम करने के लिए ग़लत रास्ता अपनाने से नही चूकता ओर हमेशा इस कशमकश मे जीता रहता है की वह वास्तव मे किस चरित्र का है? ग़लत लोग जैसे दारोगा, शिवदत्त उसे अपने जैसा ग़लत ओर इन्द्रदेव उसे सही साबित करने मे लगे रहते है! चंद्रकान्ता संतति मे भूतनाथ का आगमन एक तुरुप के पत्ते की तरह होता है जो छलावे की तरह आता है ओर बाज़ी पलट के चला जाता है! भूतनाथ कान का कच्चा इंसान है जो सभी की बातो मे आ जाता है! कभी वो बुराई की मदद करता है चंद्रकान्ता संतति के पूरक के रूप मे भूतनाथ सीरीस लिखी गयी थी! ये 7 ज़िल्द का उपन्यास बाबू देवकीनंदन खत्री का महत्वआकांक्षी उपन्यास था जिसे वो पूरा नही कर सके! माना जाता है की अगर वो इसे पूरा कर पाते तो ये उपन्यास काल्पनिक उपन्यासो का सरताज होता! पर खत्री जी का इस उपन्यास को पूरा करने से पहले ही निधन हो गया! उनके बेटे दुर्गा प्रसाद खत्री ने इस उपन्यास को पूरा किया! पर बाबू देवकी नंदन खत्री की लेखनी की चमत्कृतता इनकी लेखनी मे नही थी फिर भी इन्होने इस कहानी पूरा किया! बाद मे दुर्गा प्रसाद जी ने रोहतास मठ नाम से इस विस्मयकारी शृंखला का समापन किया!

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अकबर-बीरबल की नोंक-झोंक

मेलुहा के मृत्युंजय (Meluha ke Mrityunjai)- अमीश



1900 ईसवी पूर्व, जिसे आधुनिक भारतीय सिन्धु घाटी सभ्यता के नाम से कह जाने की गलती कर बैठते हैं।
उस समय के निवासी उस भूमि को मेलूहा के नाम से पुकारते थे - इस साम्राज्य की स्थापना भारत के सबसे महान् सम्राट प्रभु श्रीराम ने कई शताब्दियों पूर्व की थी।
एक समय गर्वशील रहे इस साम्राज्य एवं इसके सूर्यवंशी शासकों ने कई संकटों का सामना किया था क्योंकि उनकी प्राथमिक नदी पवित्र सरस्वती शनैः-शनैः सूखती हुई मृतप्राय होती जा रही है। पूर्व दिशा से अर्थात् चन्द्रवंशियों के साम्राज्य की ओर से वे अत्यंत ही विध्वंसक आतंकवादी आक्रमणों का सामना कर रहे हैं। चकित कर देने वाली एवं दुःखदायी बात यह प्रतीत होती है कि चन्द्रवंशियों ने उन नागाओं से समझौता कर लिया है जो मानव जाति में जाति बहिष्कृत एवं अशुभ जाति थी, किन्तु उनके पास अद्भुत युद्ध कौशल है।

सूर्यवंशियों की आस मात्र एक पौराणिक गाथा पर टिकी है - ‘जब बुराई एक महाकाय रूप धारण कर लेती है, जब ऐसा प्रतीत होता है कि सब कुछ लुप्त हो चुका है कि आपके शत्रु विजय प्राप्त कर लेंगे, तब एक महानायक अवतरित होगा।’

क्या वह रूखा एवं खुरदुरा तिब्बती प्रवासी शिव सचमुच ही महानायक है?

और क्या वह महानायक बनना भी चाहता है अथवा नहीं?

अपने प्रारब्ध एवं कर्त्तव्य की ओर खिंच जाने वाले एवं साथ ही प्रेम से प्रेरित शिव क्या सूर्यवंशियों के प्रतिशोध में उनका नेतृत्व करेंगे और बुराइयों का नाश करेंगे?

यह शिव पर रचना-त्रय की प्रथम पुस्तक है। शिव एक साधारण मनुष्य है जिसके कर्म उसे देवों के देव महादेव में परिवर्तित कर देते हैं।


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Saturday, 3 October 2015

कल की तैयारी

दोस्तों,
आप सभी से माफ़ी चाहता हूँ, आज मैं कोई नया अपडेट नहीं दे पाया।
पर कल आप लोगों को मिलेगा मेगा अपडेट।

Friday, 2 October 2015

फाइव पॉइंट समवन (Five Point Someone)- चेतन भगत

"चेतन का पहला उपन्यास "फाइव पॉइंट समवन - व्हाट नॉट टू डू एट आईआईटी " (२००४) , तीन विद्यार्थियों पर आधारित है जो संस्थान के भारी कार्यभार का सामना कर उससे उभरने की कोशिश करतें हैं | यह किताब इंडिया टुडे बेस्टसेलर के लिस्ट में सबसे ज्यादा दिनों तक रही (१९० सप्ताह , जनवरी २००८) | इस किताब ने २००४ में सोसाइटी यंग अचीवर अवार्ड और २००५ में पब्लिशर रेकोग्निसशन अवार्ड जीते | जाने माने हिन्दी फिल्म निर्माता, निर्देशक राजकुमार हिरानी इस किताब पर एक फिल्म बना चुके हैं जिसमें आमिर खान मुख्य भूमिका में थे |

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